क्या यही हिंदी पत्रकारिता का ‘स्वर्णयुग’ है?
- आनंद प्रधान (एसोशिएट प्रोफ़ेसर, भारतीय जनसंचार संस्थान ) क्या १८८ साल की भरी-पूरी उम्र में कई उतार-चढाव देख चुकी हिंदी ...
- आनंद प्रधान (एसोशिएट प्रोफ़ेसर, भारतीय जनसंचार संस्थान ) क्या १८८ साल की भरी-पूरी उम्र में कई उतार-चढाव देख चुकी हिंदी ...
- आनंद प्रधान (एसोशिएट प्रोफ़ेसर, भारतीय जनसंचार संस्थान ), लगता है कि भारतीय पत्रकारिता और पत्रकारों का समय कुछ अच्छा नहीं ...
आनंद प्रधान। लोक प्रसारणकर्ता की गुणवत्ता को टीआरपी की ‘लोकप्रियता’ के मानदंडों पर नहीं मापा जाना चाहिए। लेकिन सवाल यह ...
आनंद प्रधान। इस समय एक सजग, सतर्क और सक्रिय स्थानीय समाचार मीडिया की बड़ी जरूरत है जो न सिर्फ भ्रष्टाचार-अनियमितताओं ...
आनंद प्रधान। भारतीय न्यूज मीडिया खासकर न्यूज चैनल एक बार फिर गलत कारणों से अंतर्राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में हैं। 25 अप्रैल ...
यह वेबसाइट एक सामूहिक, स्वयंसेवी पहल है जिसका उद्देश्य छात्रों और प्रोफेशनलों को पत्रकारिता, संचार माध्यमों तथा सामयिक विषयों से सम्बंधित उच्चस्तरीय पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाना है. हमारा कंटेंट पत्रकारीय लेखन के शिल्प और सूचना के मूल्यांकन हेतु बौद्धिक कौशल के विकास पर केन्द्रित रहेगा. हमारा प्रयास यह भी है कि डिजिटल क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में मीडिया और संचार से सम्बंधित समकालीन मुद्दों पर समालोचनात्मक विचार की सर्जना की जाय.
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